|18| 18.04.2018 (Hindi)
'जीत मुबारक हो तुझे
अब तू इश्क की कैद से आजाद है'
दिमाग की उस दिल्लगी से
तनहा दिल अब तक नाराज़ है
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अब तू इश्क की कैद से आजाद है'
दिमाग की उस दिल्लगी से
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