|60|30.05.2018 (Hindi)
वो मसरुफ़ है मुझ पर सितम ढाने में
उसे क्या कहूं
मुझे खुद सुकून मिलता है
उससे दिल लगाने में
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वो मसरुफ़ है मुझ पर सितम ढाने में
उसे क्या कहूं
मुझे खुद सुकून मिलता है
उससे दिल लगाने में
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